नेल्सन मंडेला समरी in hindi | nelson mandela class 10th summary in hindi

नेल्सन मंडेला

दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की नीति का अंत करने वाले नेल्सन मंडेला का अपने देश में वही स्थान है, जो भारत में महात्मा गांधी का है| उन्होंने रक्तहीन क्रांति कर अफ्रीकी लोगों को उनका अधिकार दिलाया इस परिवर्तन के दौरान कोई हिंसा नहीं हुई क्योंकि वह समस्याओं का निराकरण बातचीत के द्वारा करने में आस्था रखते थे नेल्सन मंडेला के त्याग, बलिदान, साहस आदि पूरे देश के लिए प्रेरणा है|

नेल्सन मंडेला से जुड़ी जानकारी संक्षिप्त में

विषय जानकारी
नाम नेल्सन मंडेला,
रोहिल्हाला, टाटा, खुलू, डाली भुंगा
जन्म 18 जुलाई 1918
जन्म स्थान  बासा नदी के किनारे (केप प्रांत) मवेजो गांव में
माता का नामनोमजामो विनी मेडिकिलाजा
पिता का नाम गेडला हेनरी
पत्नियो का नाम इवलिस मेस,नोमजामो विनी, ग्रेस मेकल
मित्रों का नामवाटर सिसलु, वाटर अल्बर्टाइन
व्यवसायवकालत
उपलब्धिराष्ट्रपति
पुरस्कारभारत रत्न पुरस्कार
मृत्यु5 दिसंबर 2013

नेल्सन मंडेला जीवन परिचय

अब्राहम लिंकन और मार्टिन लूथर किंग के विचारों को मानने वाले दक्षिण अफ्रीका के गांधी,नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को बासा नदी के किनारे (केप प्रांत) मवेजो गांव में हुआ था|उनकी माता का नाम नोमजामो विनी मेडिकिलाजा था और वह एक मैथोडिस्ट थी उनके पिता का नाम गेडला हेनरी था जो अपने गांव के प्रधान थे वह गांव के प्रधान के पुत्र को मंडेला कहा जाता था इसलिए मंडेला नाम उन्हें विरासत में मिली है तथा प्राथमिक विद्यालय के एक अध्यापक के द्वारा उनका नाम नेल्सन रखा गया था इस प्रकार वह नेल्सन मंडेला नाम से प्रसिद्ध हो गए|

उनके माता-पिता ने उनका नाम रोहिल्हाला रखा था| लेकिन दुनिया उन्हें नेलसन मंडेला नाम से ही जानती है किंतु वे और नामों से भी जाने जाते हैं मंडेला को दक्षिण अफ्रीका में प्राय मदीबा के नाम से भी जाना जाता है जो बुजुर्गों के लिए आदर सूचक शब्द है बहुत से लोग उन्हें टाटा और खुलू  भी कहते हैं| जिसका अफ्रीका भाषा में अर्थ पिता और दादा है किशोरावस्था में उन्हें डाली भुंगा के नाम से भी पुकारा जाता था|

नेल्सन मंडेला शिक्षा

मंडेला के प्रारंभिक शिक्षा क्लार्कबेरी मिशनरी स्कूल में तथा स्नातक की शिक्षा हेल्डटाउन में हुई थी, जहां अश्वेतों  के लिए एक विशेष कॉलेज था| वर्ष 1940 तक मंडेला ने कालेज कैंपस में अपने राजनीतिक विचारों और क्रियाकलापों से लोकप्रियता अर्जित कर ली थी जिसके कारण उन्हें कार्य से निकाल दिया गया|

नेल्सन मंडेला विवाह

नेल्सन क्रांतिकारी की राह पर चल पड़े थे जिसके कारण उनके परिवार वालों को उनकी चिंता होने लगी और उन्होंने उनकी शादी कराने का निर्णय लिया लेकिन मंडेला शादी से भाग खड़े हुए और जोहानेसबर्ग भाग गए लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि शादी से भागने वाले मंडेला ने 3 विवाह किया था मंडेला ने 1994 में  पहला विवाह अपने मित्र वाटर सिसलु के बहन इवलिस मेस से किया था| 1961 में मंडेला पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया लेकिन वह निर्दोष साबित हुए वहां उनकी मुलाकात नोमजामो विनी से हुई| उन्होंने उनसे दूसरा विवाह किया|तथा तीसरा विवाह 1998 में अपने 80वे जन्म दिन पर ग्रेस मेकल से किया था| जिनसे उनको 6 संतान प्राप्त हुए| उनके खानदान में 17 पोता पोती थे|

रंगभेद का अंत

मंडेला को दक्षिण अफ्रीका का गांधी कहा जाता था वह गांधी जी के नक्शे कदम पर चला करते थे| तथा अब्राहम लिंकन और मार्टिन लूथर किंग के विचारों का भी समर्थन करते थे| दक्षिण अफ्रीका को रंगभेद की नीति से मुक्ति दिलाने में मंडेला का बहुत बड़ा योगदान रहा है| उन्होंने एक रक्तहीन क्रांति कर अफ्रीका के लोगों को उनका अधिकार दिलाया बल्कि रंगभेद की नीति का अंत भी किया| नेल्सन मंडेला के त्याग, बलिदान, साहस, आदि पूरे विश्व के लिए प्रेरणा है

मंडेला की नौकरी

काजल से निष्कासित होने के बाद वे घर से भागकर जोहांसबर्ग चले आए,जहां उन्होंने सोने की तथा कोयले की खदान में चौकीदारी की नौकरी की और एलेग्जेंडरा नामक बस्ती में रहने लगे इसके उपरांत उन्होंने एक कानूनी फर्म में लिपिक की नौकरी भी की थी

राजनीतिक संघर्ष

मंडेला ने वाटर सिसलु, वाटर अल्बर्टाइन तथा कुछ अन्य साथ मिलकर ‘अफ्रीकन कांग्रेस यूथ लीग’ का गठन किया तथा वर्ष 1947 में मंडेला इस गठन के सचिव चुने गए वर्ष 1951 में मंडेला को यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया वर्ष 1952 में उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए एक कानूनी फर्म की स्थापना की किंतु वर्गभेद के आरोप में उन्हें जोहांसबर्ग से बाहर भेज दिया गया प्रतिबंध के बावजूद भी वे अश्वेतो की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे सरकार द्वारा एएनसी के अध्यक्ष और सहित देशभर के 156 नेता गिरफ्तार किए गएइस तरह आंदोलन नेतृत्वहीन हो गया

1961 में मंडेला तथा उनके 29 साथियों को निर्दोष घोषित करते हुए छोड़ दिया गया सरकार के दमन चक्र के कारण मंडेला का जनाधार बढ़ता जा रहा था उनके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कानून पास किए गए जो अश्वेतो  के हित में नहीं था मंडेला ने इसका विरोध किया किंतु प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गई इसके बाद एएनसी ने हथियारबंद लड़ाई लड़ने का निर्णय किया और लड़ाई लड़ने वाले दल का नाम ‘स्पीयर ऑफ द नेशन‘ रखा गया तथा मंडेला को इसका अध्यक्ष बनाया गया अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए मंडेला देश से बाहर चले गए तथा आदेश अबाबा में अपने आधारभूत अधिकारों की मांग करने लगे

27 वर्ष जेल तथा राष्ट्रपति

मंडेला को गिरफ्तार कर 5 साल की सजा सुनाई गई उन पर यह आरोप लगाया गया कि वह असंवैधानिक तरीके से देश छोड़कर चले गए थेइसी दौरान सरकार ने लीलीसलीफ में छापा मार कर सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया तथा मंडेला सहित सभी को उम्र कैद की सजा सुनाई गई सरकार नेल्सन को क्रांति का नेता मान रही थी उन्हें रोबन ‘द्वीप भेज’ दिया गया जो दक्षिण अफ्रीका का काला पानी माना जाता है जहां उन्हें अपने जीवन के 27 वर्ष बिताने पड़े वर्ष 1998 में दक्षिण अफ्रीका में सत्ता परिवर्तन हुआ तथा उदारवादी नेता एफडब्लूडी  क्लार्क देश के राष्ट्रपति बने|

उन्होंने अश्वेत दलों पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए तथा अपराधिक मामले चलने वाले बंधुओं को छोड़ सभी को रिहा कर दिया इसी के पश्चात मेंडल के जीवन का उदय हुआ तथा 11 फरवरी 1990 को वह संपूर्ण रूप से आजाद हो गए वर्ष 1994 में देश के पहले लोकतांत्रिक चुनाव में जीतकर वह दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने|

नेल्सन मंडेला के मानवाधिकार से संबंध रंगभेद विरोधी संघर्ष के लिए नवंबर 2009 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने उनके जन्मदिन 18 जुलाई को मंडेला दिवस घोषित किया| मंडेला को विश्व के विभिन्न देशों और संस्थाओं द्वारा 250 से भी अधिक सम्मान और पुरस्कार प्रदान किए गए हैं वर्ष 1993 में उन्होंने संयुक्त संयुक्त रूप से दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति एफडब्लूडी  क्लार्क के साथ नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया वर्ष 1990 में उन्हें भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया मंडेला भारत रत्न प्राप्त करने वाले पहले विदेशी हैं उन्हें प्रेसिडेंट मेडल आफ फ्रीडम ऑर्डर आफ लेनिन गांधी शांति पुरस्कार आदि से सम्मानित किया गया|

नेल्सन मंडेला की मृत्यु

इतने विशाल व्यक्तित्व वाले नेल्सन मंडेला का 5 दिसंबर 2013 को फेफड़ों में संक्रमण  हो जाने के कारण हार्टन जोहांसबर्ग स्थित अपने घर में निधन हो गया दक्षिण अफ्रीका के लोग उन्हें राष्ट्रपिता मानते हैं तथा उन्हें दक्षिण अफ्रीका में  लोकतंत्र के संस्थापक राष्ट्रीय मुक्तिदाता और उदारकर्ता के रूप में देखा जाता है|

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