बाढ़ की समस्या पर निबंध | flood problem essay in hindi

बाढ़ की समस्या पर निबंध(flood problem essay in hindi) (बाढ़ क्या है, प्रभाव, कारण, दुष्परिणाम, नियंत्रण के उपाय, सुझाव, उपसंहार)- जो कि हमारे स्कूल कॉलेज में पुचा जाता है| आज हम इसी बात पर चर्चा करेंगे|

प्रस्तावना

भारत हर प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों एवं मानव संसाधनों से संपन्न देश है| भारत भी अमेरिका, चीन व अन्य विकसित देशों की तरह आर्थिक दृष्टि से मजबूत है, किंतु भारत को समय-समय पर अनेक आपदाओं का सामना करना पड़ता है जो देश के आर्थिक विकास की गति को रोक देती है प्राकृतिक आपदाओं में बाढ़ की समस्या भी शामिल है भारत को हर साल इस समस्या का सामना करना पड़ता है|

बाढ़ क्या है

बाढ़ की समस्या के बारे में चर्चा करने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि बाढ़ वास्तव में क्या है दर असल जब बरसात के मौसम में नदियों के जलस्तर में वृद्धि होती है तो इसके कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है नदियों का पानी निचले क्षेत्रों में भर जाता है नदियों के आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा हो जाता है इसी स्थिति को बाढ़ कहा जाता है

बाढ़ के लाभ

जहां बाढ़ एक तरफ कहर लाती है वही बाढ़ से एक ही लाभ भी है इसके साथ आने वाली उपजाऊ मिट्टी से नदियों के आस पास का क्षेत्र उर्वरक हो जाता है किंतु यह लाभ इससे होने वाली हानियों की तुलना में नगणय है इसकी क्षतिपूर्ति करना बाद में कष्टदायी होता है जनधन की हानि होती है तथा रेल मार्ग भी अवरुद्ध हो जाता है

बाढ़  के कारण उत्पन्न समस्या

हमारे देश में चारों ओर जल प्रलय का दृश्य, जिसमें खेत-के-खेत बहे जा रहे हो, मरे हुए जानवरों की लाशें नजर आ रही हो, लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थान की तलाश में पानी में तैरते हुए नजर आ रहे हो, यह दृश्य बाढ़ की समस्या को दर्शाने के लिए पर्याप्त है

बाढ़ के कारण मानव जीवन पर प्रभाव

भारत में प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर के महीने तक अत्यधिक वर्षा होती है इसलिए इस अवधि के दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में बाढ़ का कहर देखने को मिलता है बाढ़ की समस्या का दृष्टि बहुत भयावह होता है चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल होता है लोग अपनी जान बचाने का विफल प्रयास करते नजर आते हैं चारों ओर जल जमाव हो जाने के कारण पानी में तैरते हुए लोग नजर आते हैं

जल प्रवाह तेज होने तथा नदियों का बांध टूटने के कारण लोग को अपनी जान बचाने का मौका भी नहीं मिलता, मिट्टी तथा खपरैल के घर बाढ़ के पानी में बहते नजर आते हैं चारों तरफ चीख-पुकार की आवाज सुनाई देती है लोग जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की शरण लेते नजर आते हैं पूछा था ना मिलने की स्थिति में लोग पेड़ों पर भी शरण लेने को विवश हो जाते हैं

खुले आसमान के नीचे बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में रहना मौत को दावत देना है सरकार द्वारा लोगों को बचाने के लिए  नावो एवं हेलीकॉप्टर का प्रयोग खाद सामग्री उन तक पहुंचाने के लिए किया जाता है लोग इन खाद सामग्री पर जानवरों की तरह टूट पड़ते हैं इस तरह बाढ़ की समस्या मानव को पशु बनने पर मजबूर कर देती है

बाढ़ आने के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं

  1. बाढ़ के इस विपदा से देश के जन और धन को बचाने के लिए आज यह आवश्यक हो गया है कि भारत में बाढ़ के प्रमुख कारणों पर गहन दृष्टि डालें क्योंकि तभी बाढ़ से निपटने की दशा में उठाया गया कोई कदम प्रभावी होगा
  2. बाढ़ में अत्यधिक वर्षा बाढ़ का प्रमुख कारण है विशेष रुप से कम समय में अधिक वर्षा बहुत चिंता का विषय है उदाहरणस्वरूप जून 2013 में उत्तराखंड में हुई भारी बारिश से तबाही का दृश्य आज भी लोगों के मन में डर पैदा कर देता है
  3. भारी बारिश में  उफान  आना बाढ़ का दूसरा सबसे बड़ा कारण है कभी-कभी निरंतर वर्षा से विस्तृत क्षेत्र का पानी छोटी नालियों नालों से प्रवाह होता हुआ अत्यंत नदी में मिल जाता है जिससे नदियों का जल अपने किनारों को तोड़ता हुआ आसपास के विस्तृत क्षेत्र को जलमग्न कर देता है
  4. हिम गलन बढ़ जाना बाढ़ का तीसरा प्रमुख कारण है इससे विशेष रूप से उत्तर भारत में हिमालय से निकलने वाली नदियों जैसे गंगा जमुना कोसी और ब्रह्मपुत्र इत्यादि से बाढ़ आता है
  5. चक्रवात के कारण होने वाली अत्यधिक वर्षा भी बाढ़ का प्रमुख कारण है यह मुख्यता तटीय क्षेत्र में आती है
  6. ग्लोबल वार्मिंग बाढ़ का प्रमुख कारण है इसके कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है और साथ ही पृथ्वी का वातावरण बदल जाता है जिसके कारण कहीं सूखा पड़ता है तो कहीं अधिक वर्षा होती है इससे बाढ़ की स्थिति पैदा होती है

बाढ़ से होने वाले नुकसान व दुष्परिणाम

बाढ़ के आने से भयंकर तबाही होती है इसका लेखा-जोखा रखना इतना आसान नहीं होता क्योंकि यह बहुत अधिक दिनों तक तबाही मचाती है इसमें बाढ़ आने पर भी हानि होती है और बाढ़ का पानी सूख जाने पर भी इसके दुष्परिणाम निम्न है|

1 जल का प्रदूषित होना

बाढ़ के कारण पानी में तरह तरह के रसायन और नाले का पानी मिल जाता है जिसके कारण जल की आपूर्ति नहीं हो पाती और वहां के लोग दूषित जल के कारण रोग ग्रस्त या उनकी मृत्यु भी हो जाती है

2 फसलों का बर्बाद होना

किसानों द्वारा बोई गई पूरी फसल खराब हो जाती है जिसके कारण खाने पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ जाते हैं किसानों की फसल नष्ट होने के कारण वे और भी गरीब हो जाते हैं उनको खाने-पीने का भी अभाव हो जाता है

3 मिट्टी का कटाव

बाढ़ आने से खेतों की उपजाऊ मिट्टी बह जाती है जिसके कारण बाढ़ के पश्चात वहां पर अच्छी फसल नहीं हो पाती साथ ही कई स्थान पर बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं

4 सड़कों का टूटना

जिस क्षेत्र में बाढ़ आती हैं वहां की सारी सड़कें  टूट जाती हैं या फिर बाढ़ के पानी के साथ बस जाती है जिसके कारण वहां पर कई माह तक यातायात प्रभावित होता है सड़के नहीं होने के कारण लोगों को कई प्रकार की परेशानियां होती हैं

5 चिकित्सालय सुविधा का अभाव

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ के पानी के कारण सभी अस्पताल पानी में डूब जाते हैं जिसके कारण वहां पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाती

6 महामारी का खतरा

जब बाढ़ का पानी सूख जाता है तब वहां पर मलेरिया डेंगू है और दूसरे जल हैं भोजन से होने वाली कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है और अक्सर बाढ़ के पानी से बीमारियां अवश्य फैलती हैं इसलिए सदैव सुरक्षित रहने का प्रयास करना चाहिए

बाढ़ नियंत्रण के उपाय

भारत सरकार एवं राज्य सरकार बाढ़ की समस्या को कम करने के लिए योजना काल से ही प्रयत्नशील है प्रत्येक पंचवर्षीय योजना में इसके लिए अलग से धन की व्यवस्था की जाती है इस दशा में किए गए प्रयासों का संक्षिप्त विवरण निम्न है|

1 राष्ट्रीय बाढ़ प्रबंध कार्यक्रम वर्ष 1954 में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत सरकार ने एक राष्ट्रीय बाढ़ प्रबंध कार्यक्रम की घोषणा की यह कारण तीन चरणों में विभाजित किया गया है तत्कालिक, आपातकालीन, और दीर्घकालिक इस योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने और निचले क्षेत्र में फंसे लोगों को ऊंचाई वाले स्थान पर लाने तथा जल निकास की उचित व्यवस्था का प्रावधान किया गया है

2 जलाशयों का निर्माण जिन नदियों की निकली धाराओं में सर्वाधिक एवं विनाशकारी बाढ़ आती है उन पर बड़े-बड़े बांध बनाकर जलाशयों में वर्षा के पानी को रोकने की व्यवस्था की गई है

3 समुद्री क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण केरल, कर्नाटक, और आंध्र प्रदेश के प्रमुख तटीय क्षेत्र में समुद्री बाढ़ आती है समुद्री तटों पर क्षरण को रोकने के लिए कई परियोजनाएं प्रारंभ की गई है केरल राज्य में सर्वाधिक प्रभावित 320 किलोमीटर लंबी समुद्री तट को मार्च 1990 के अंत तक प्रतिरक्षित कर लिया गया था

4 बाढ़ का पूर्वानुमान चेतावनी बाढ़ प्रबंध हेतु पूर्व अनुमान लगाना और पहले से चेतावनी देना महत्वपूर्ण तथा किफायती उपायों में से एक है भारत में यह कार्य वर्ष 1959 से किया जा रहा है

5 ब्रह्मपुत्र बाढ़ नियंत्रण बोर्ड ब्रह्मपुत्र और बराक नदी घाटी देश में बाढ़ से प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्र हैं इस क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण का मास्टर प्लान तैयार किया गया है

6 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन भारत सरकार द्वारा आपदा प्रबंध अधिनियम 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंध प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल का गठन किया गया है

7 नदी जोड़ो परियोजना यह जल आपूर्ति के साथ बाढ़ नियंत्रण में भी सहायक है इसके तहत केन-वेतना लिंक परियोजना को पूरा कर लिया गया है

बाढ़ नियंत्रण के सुझाव

निरोधात्मक उपायों का संबंध ऐसे दीर्घकालिक एवं स्थाई उपायों से होता है जिस को अपनाने से बाढ़ एवं जल के आपलावन की स्थिति उत्पन्न ना होने देने में सहायता मिलेगी इसके लिए नदियों सहायक नदियों तथा नालों पर जगह-जगह चेक डैम बनाकर जलाशयों का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि वर्षा के जल को नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में ही प्रभावपूर्ण ढंग से रोका जा सके

उपसंहार

बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है जो हमारे देश के विकास के लिए रुकावट पैदा करती है जिसको नियंत्रण करना अत्यंत कठिन है लेकिन असंभव नहीं है योजनाओं और राजनीति को अपनाकर ऐसी स्थिति पैदा की जा सकती है कि बाढ़ एवं जल पलावन की स्थिति उत्पन्न ना हो अब तो ऐसी तकनीक का विकास हो गया है जिसका प्रयोग करके 2 या 3 दिन पूर्व ही अधिकाधिक वर्षा होने या बाढ़ आने की चेतावनी देखकर लोगों को बाढ़ के खतरे से बचा जा सकता है तथा बहुत बड़ी सीमा तक बाढ़ से होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है

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