समय का महत्व व सदुपयोग पर निबंध | samay ka mahatva sadupyog nibandh in hindi

समय का महत्व सदुपयोग पर निबंध | (samay ka mahatva sadupyog nibandh in hindi) समय हमारे लिए बहुत मूल्यवान है जिसकी हम कदर नहीं करते हैं एक बार सही समय निकल जाने के बाद सिर्फ पछतावा ही मिलता है और जिसे पैसे से भी वापस नहीं लाया जा सकता | हर मनुष्य के जीवन में एक न एक बार सही समय आता है समय का सही उपयोग ना करने के कारण हमें अपने जीवन में कभी न कभी पछताना पड़ता है इसलिए हमें समय के महत्व ( samay ka mahatva ) को समझते हुए समय का सदुपयोग ( samay ka sadupyog )  करना चाहिए| नहीं तो जीवन में असफलता ही हाथ लगेगी जिससे हमे समय के दुष्परिणाम को सहना पड़ेगा |

प्रस्तावना

समय का मूल्य पहचानते हुए बेंजामिन फ्रैंकलीन ने कहा है बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता और यह सच भी है कि खोया हुआ धन अर्जित किया जा सकता है खोए हुए वैभव की पुनः प्राप्त की जा सकती है उचित चिकित्सा व संयम के बल पर खोए हुए स्वास्थ्य को फिर से बहाल किया जा सकता है अभ्यास के द्वारा भूली हुई विद्या भी पुनः पाई जा सकती है किंतु समय को एक बार होने के बाद फिर से पाना संभव नहीं क्योंकि यह निरंतर गतिशील है कबीर ने मृत्यु को अवश्यंभावी बताकर जीवन के एक-एक पल का सदुपयोग करने की सीख देते हुए कहा है|

“काल करै सो आज कर , आज करै सो अब|

  पल में प्रलय होएगी, बहुरि करैगा कब||”

समय का महत्व

प्रसिद्ध लेखक मेसन  ने समय को महिमामंडित करते हुए कहा है-” स्वर्ण के प्रत्येक कण तरह ही समय का प्रत्येक क्षण मूल्यवान है|” प्लेटफार्म पर खड़ी रेलगाड़ी अपने यात्रियों की प्रतीक्षा नहीं करती और देर से पहुंचने वाले अफसोस करते रह जाते हैं इसी तरह समय भी किसी की प्रतीक्षा नहीं करता अंग्रेजी में कहा गया है ‘Time and tide waist for none’अर्थात समय और समुद्र की लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करते| मानव जीवन में समय की महत्ता को समझाने के लिए प्रकृति में भी उदाहरण भरे पड़े हैं कभी-कभी बरसात के मौसम में वर्षा इतनी देर से शुरू होती है कि खेतों में लगी फसलें सूख जाती हैं ऐसे में भला वर्षा होने का भी क्या लाभ भक्त कवि तुलसीदास ने प्रकृति के इसी उदाहरण का उल्लेख करते हुए जीवन में समय की महत्ता को इस प्रकार से समझाया है|

“का बरखा जब कृषि सुखाने|

        समय चौकी पुणे का पछताने||”

समय के मूल्य को समझने वाले लोगों की दिनचर्या हर रोज सुबह शुरू हो जाती है बुद्धिमान व्यक्ति अपने अवकाश के समय को भी व्यर्थ नहीं जाने देते, इस संदर्भ में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बड़ी अच्छी बात कही है- समय की माप बीते वर्षों से नहीं की जाती बल्कि, उससे की जाती है कि कोई उस अवधि में क्या करता है, कैसा महसूस करता है, और क्या प्राप्त करता है, जो व्यक्ति अपना निश्चित कार्यक्रम बनाकर मानसिक वृत्तियों को स्थिर एवं संयमित करके कार्य करता है उसे जीवन संग्राम में अवश्य सफलता प्राप्त होती है|

छात्रावास में समय का महत्व

परीक्षा में तो अभी काफी दिन बाकी हैं, कल से पढ़ना शुरू कर देंगे, ऐसा सोच कर कुछ विद्यार्थी कभी नहीं पढते, किंतु परीक्षा नियत समय एवं तिथि पर ही होती है| परीक्षा में प्रश्नों को देखकर उन्हें लगता है कि यदि उन्होंने समय का सदुपयोग किया होता तो परीक्षा हाल में यूं ही खाली नहीं बैठना पड़ता इसलिए कहा गया है-

“अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत|”

जीवन में प्रत्येक कार्य के लिए नियत समय निर्धारित होता है पढ़ने के समय पढ़ना चाहिए एवं खेलने के समय खेलना कक्षा में बैठकर खेलकूद की बातों में खोए रहना एवं खेल के मैदान में पढ़ाई लिखाई की बातें करने को तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता अंग्रेजी में कहा गया है “work while you work and play, while you play this is the way to be happy and day” अर्थात प्रत्येक दिन खुश रहने के लिए काम के समय काम करो एवं खेल के समय खेलो किंतु, विद्यार्थी जीवन में  समय की सर्वाधिक महत्ता है जो विद्यार्थी नियत समय में पूर्ण मनोयोग के साथ अपने पढ़ाई करते हैं उन्हें सफलता अवश्य मिलती है|

समय का दुरुपयोग व दुष्परिणाम

जो व्यक्ति समय का दुरुपयोग करते हैं उन्हें जीवन में असफलता ही हाथ लगती है दिन भर काम करने के बाद रात्रि में सही समय पर बिस्तर पर सोने के लिए चले जाना चाहिए| देर से सोने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है इसी प्रकार सुबह देर से उठने पर भी बहुत से कार्यो के अधूरे रहने का भय होता है अधिकतर लोगों को अपना समय मनोरंजन में व्यतीत करते देखा जाता है मनोरंजन भी जीवन के लिए अनिवार्य है किंतु काम करने के समय यदि मनोरंजन किया जाए तो उसे किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता है अतः किसी समय का कार्य क्या है|

अपने दिनचर्या में इसकी समुचित व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक है जिस मनुष्य का कार्यक्रम सुनिश्चित नहीं होता उसका अधिकांश समय व्यर्थ में ही इधर-उधर की बातों में बीत जाता है इस तरह समय का अपव्यय करना तो आत्महत्या के समान ही है समय का दुरुपयोग भी उससे कुछ कम नहीं हैक्योंकि समय के बीत जाने के बाद अफसोस करने से बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आ सकता शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए समय पर सोना, समय पर उठना एवं भोजन व्यायाम तथा अन्य कार्यों को सुनिश्चित ढंग से समय पर करना आवश्यक है धन दौलत को जमा कर रखा जा सकता है|

किंतु समय को जमा कर नहीं रखा जा सकता है सुबह की शुद्ध हवा का आनंद उठाने के लिए सुबह ही उठना होगा, देर से उठने वाले लोगों को सुबह की स्वच्छ व निरोग हवा नसीब नहीं हो सकती| आलसी एवं कमजोर व्यक्तियों का जीवन परनिंदा, नीरूउद्देश्य, भ्रमण आदि निरर्थक कार्यो में बीतता  है आलस्य का परित्याग करके समय का सदुपयोग करने वाले व्यक्ति ही साहित्य के राष्ट्रनेता, महान वैज्ञानिक एवं कलाकार बन पाते हैं|

समय का सदुपयोग

समय का सदुपयोग एक निश्चित दिनचर्या से ही संभव है मनुष्य जीवन ईश्वर की दी हुई नियामत ( ईश्वर प्रदत्त वैभव) है इसलिए इसे अपने लिए और दूसरों के लिए सार्थक बनाना ही मनुष्य का धर्म है और मनुष्य अपने इस धर्म का निर्वाह तब ही कर सकता है जब वह समय की गति को समझें और उसका सदुपयोग करें| हमें जोसेफ हाक  की कही  इन पंक्तियों के मर्म को समझने और उसे अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है- प्रतिदिन लघु जीवन है तथा हमारा संपूर्ण जीवन सिर्फ एक ही दिन की पुनरावृति है इसलिए हमें एक-एक दिन को इस प्रकार जीना चाहिए जैसे-

वह जीवन का आखरी दिन हो  एक बार एक चित्रकार ने समय का चित्र बनाया जिसमें एक अति सुंदर व्यक्ति हंसता हुआ दोनों हाथ फैलाए खड़ा था सामने से उसे उसके केश  सुंदर दिख रहे थे पर पीछे से वह बिल्कुल गंजा था इस चित्र के माध्यम से चित्रकार यह संदेश देना चाहता था कि समय जब आता है तो आपकी ओर बाहें फैलाए आता है ऐसे में यदि आपने सामने से आते हुए समय के केश  पकड़ लिए तो वह आपके काबू में होगा किंतु यदि आपने उसे निकल जाने दिया तो पीछे से आपके हाथ उसके गंजे सिर पर से चलते रह जाएंगे और फिर वह आप की पकड़ में नहीं आएगा|

निष्कर्ष

समय को पहचान कर उसका सदुपयोग करना चाहिए| समय के सदुपयोग में ही जीवन की सफलता का रहस्य निहित है राजा हो या रंक मूर्ख हो या विद्वान समय किसी के लिए अपनी गति मंद नहीं करता| इसलिए सबको जीवन में सफलता के लिए समय का सदुपयोग करना ही पड़ता है आज तक जितने भी महापुरुष हुए हैं उनकी सफलता का रहस्य जीवन के हर पल का सदुपयोग ही रहा है इसलिए अंग्रेजी में कहा गया है “टाइम इज मनी“अर्थात “समय ही धन है” जो इस धर्म को यूं ही लुटाता रहता है वह 1 दिन समय का रोना रोता रहता है किंतु बाद में पछताने से कुछ नहीं मिलता है|

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