abraham lincoln biography in hindi | अब्राहम लिंकन का जीवन परिचय

अब्राहम लिंकन

‘असफलता, सफलता की कुंजी होती है’, इस कहावत को चरितार्थ करने वाले अब्राहम लिंकन की जीवनी ने ऐसा ही अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो किसी भी व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकता है| अपने जीवन के अधिकांश वर्षों में केवल असफलता से ही लड़ते रहे| 22 वर्ष की उम्र में व्यापार में असफल होने के बाद 23 वर्ष की उम्र में राजनीति में कदम रखते हुए वे विधायक का चुनाव हार गए, 24 वर्ष की उम्र में उन्हें पुनः व्यापार में असफलता का सामना करना पड़ा है, और 26 वर्ष की उम्र में उनकी पत्नी का देहांत हो गया|

अब्राहम लिंकन से जुड़ी जानकारी संक्षिप्त में

विषयजानकारी
नाम अब्राहम लिंकन
स्थान अमेरिका के केटुकी नामक स्थान पर
जन्म जन्म 12 फरवरी 1809
मृत्यु14 अप्रैल 1865 को 
व्यवसायवकालत
उपलब्धिराष्ट्रपति
माता का नामनैंसी लिंकन
पिता का नामटॉमस लिंकन

अब्राहम लिंकन का जीवन परिचय               

अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी 1809 को अमेरिका के केटुकी नामक स्थान पर एक गरीब किसान के यहां हुआ था| उनके पिता का नाम टॉमस लिंकन तथा माता का नाम नैंसी लिंकन था| जब वे मात्र 9 साल के थे तब उनकी माता का देहांत हो गया, जिसके बाद उनके पिता ने दूसरा विवाह कर लिया शायद यही कारण था कि लिंकन धीरे-धीरे पिता से दूर होते चले गए|

उनके माता पिता अधिक शिक्षित नहीं थे, इसीलिए लिंकन की प्रारंभिक शिक्षा सही प्रकार से नहीं हो सकी, लेकिन कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्होंने न केवल अच्छी शिक्षा प्राप्त की बल्कि वे वकालत की डिग्री पाने में भी सफल रहे लिंकन अपने मानवतावादी दृष्टिकोण के कारण वे वकालत के व्यवसाय में असफल रहे | इसके बाद उन्होंने रिपब्लिक पार्टी के सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की|

अब्राहम लिंकन की सफलताएं और असफलताएं

27 वर्ष की उम्र में उन्होंने नर्वस ब्रेकडाउन बीमारी का शिकार होना पड़ा 29 वर्ष की उम्र में वे स्पीकर का चुनाव हार गए 31 वर्ष की उम्र में इलेक्टर  का चुनाव हार गए 39 वर्ष की उम्र में अमेरिका कांग्रेस के चुनाव में उन्होंने हार का सामना करना पड़ा 46 वर्ष की उम्र में वे सीनेट का चुनाव हार गए 47 वर्ष की उम्र में उपराष्ट्रपति का चुनाव हार गए 49 वर्ष की उम्र में दूसरी बार सीनेट के चुनाव में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा यदि यह कहा जाए कि उन्होंने असफलता की पराकाष्ठा पार कर ली थी तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी

इतनी असफलता के पश्चात शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च और प्रतिष्ठित पद के लिए उम्मीदवार बनने की बात सोच सके| अब्राहम लिंकन ने पराजय को भी पराजित करते हुए उस समय अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की जब उन्होंने 1861 ई.  में 51 वर्ष उम्र में राष्ट्रपति का चुनाव जीता तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के 16 राष्ट्रपति निर्वाचित होकर न केवल यह सिद्ध किया कि इस पद हेतु सर्वाधिक उपयुक्त उम्मीदवार हैं बल्कि उन्होंने असफलता को सफलता में बदलकर एक उदाहरण प्रस्तुत किया है इस प्रकार संयुक्त राज्य अमेरिका के 16 राष्ट्रपति निर्वाचित हुए|

राष्ट्रपति के रूप में लिंकन

जब लिंकन राष्ट्रपति बने| उस समय अमेरिका गुलामी प्रथा की समस्या से जूझ रहा था गोरे लोग दक्षिण राज्यों के बड़े खेतों में स्वामी थे और वह अफ्रीका से अश्वेत लोगों को अपने खेतों में काम कराने के लिए नियमित रूप से बुलाते थे तथा वहां उन्हें दास के रूप में रखा जाता था उत्तरी राज्यों के लोग गुलामी की प्रथा के विरुद्ध थे तथा वे इसे समाप्त करना चाहते थे अंत में उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच एक ग्रह युद्ध छिड़ गया लिंकन ने घोषणा की कि ‘एक राष्ट्र आधा दास और आधा बिना दास नहीं रह सकता‘ अंततः उत्तरी राज्यों की जीत हुई देश को गृह युद्ध से निकालना लिंकन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी

दास प्रथा

लिंकन एक अच्छे राजनेता ही नहीं बल्कि एक प्रखर व्यक्ति भी थे प्रजातंत्र की परिभाषा देते हुए उन्होंने कहा प्रजातंत्र जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन है| वे राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी सदा न केवल विनम्र रहे बल्कि यथासंभव गरीबों की भलाई के लिए भी प्रयत्न करते रहे दास प्रथा के उन्मूलन के दौरान उन्हें अत्यधिक विरोध का सामना करना पड़ा किंतु अपने कर्तव्य को समझते हुए वह अत्यंत इस कार्य को करने में सफल रहे अमेरिका में दास प्रथा के अंत का अंतरराष्ट्रीय महत्व इसलिए भी है

कि उनके बाद ही विश्व में दास प्रथा समाप्त हो गया|अपने देश में इस प्रथा की समाप्ति के बाद विश्व के अन्य देशों में भी इसकी समाप्ति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है| 1865 ईस्वी में अमेरिका के संविधान में 13वें संशोधन द्वारा दास प्रथा की समाप्ति का श्रेय लिंकन को ही जाता है |

लिंकन का स्वभाव

लिंकन का व्यक्तित्व मनुष्य के लिए प्रेरणा का दुर्लभ स्रोत है वह मानवता से प्रेम करते थे तथा शत्रुता की भावना से कोसों दूर रहते थे गृह युद्ध के दौरान 1 दिन सायंकाल वे अपने सैनिकों के शिविर में गए वहां सभी का हालचाल पूछा और काफी समय सैनिकों के साथ बिताते हुए घायल सैनिकों से बातचीत कर उनका उत्साहवर्धन किया है जब शिविर से बाहर आए तो अपने साथ के लोगों से कुछ बातचीत करने के बाद शत्रु सेना के शिविर में जा पहुंचे वहां के सभी सैनिक व अवसर लिंकन को अपने बीच देखकर चकित हो गए लिंकन ने उन सभी से अत्यंत स्नेह पूर्वक बातचीत की लेकिन उन सभी को यह बड़ा अजीब सा लगा

जब लिंकन शिविर से बाहर निकले तो सभी उनके सम्मान में उठकर खड़े हो गए लिंकन ने उन सभी का अभिवादन किया और अपने कार में बैठने लगे तभी वहां खड़ी एक वृद्धा ने कहा तुम तो अपने शत्रुओं से भी इतने प्रेम से  मिलते हो जबकि तुमने तो उन्हें समाप्त करने की भावना होनी चाहिए तब लिंकन ने मुस्कराकर जवाब दिया है यह कार्य मैं उन्हें अपना मित्र बना कर भी कर सकता हूं इस से ज्ञात होता है की लिंकन इस बात में विश्वास नहीं करते थे कि मित्रता बड़े से बड़े शत्रु का भी अंत कर सकती है|

लिंकन की मृत्यु

एक सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिका के अब तक के सभी राष्ट्रपतियों में लोकप्रिय के मामले में लिंकन का स्थान सबसे ऊपर है 14 अप्रैल, 1865 को फोर्ड थिएटर में ‘अवर अमेरिकन कजिन’ नामक नाटक देखते समय जान विल्किस  नाम के एक अभिनेता ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी उनकी हत्या के बाद अमेरिका में विद्वानों की एक सभा में कहा गया-

” लिंकन की भले  हत्या कर दी गई हो, किंतु मानवता की भलाई के लिए दास प्रथा उन्मूलन का जो महत्वपूर्ण कारण किया है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकतालिंकन अपने विचार और अच्छे कर्मों के कारण सदैव हमारे साथ रहेंगे|” उनके व्यक्तित्व का ही अनुपम प्रभाव था कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा अब्राहम लिंकन के योगदान को समझते हुए अपने राष्ट्रपति पद हेतु  शपथ ग्रहण करने से पहले उस स्थान पर गए जहां से लिंकन ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी|

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